आत्म कथा
आत्म कथा :
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दिनांक ११ फरवरी सन्२०२३ को मेरी उम्र ८० वर्ष हो जायगी।इस उम्र मैं मैंने अपनों से क्या पाया ,कुछ लिखने का प्रयास किया है।
इस उम्र को प्राप्त करने मे मैं सर्व प्रथम जगत-नियन्ता ईश्वर का आभार प्रकट करता हूं और उनके श्री चरणों मे नमन-वन्दन करता हूं।
द्वितीय मेरे माता-पिता को जिन्होंने अवर्णनीय परिश्रम करके उस कठिन समय मे भी मुझे पढ़ाई से वंचित नहीं किया और मैं सतत आगे बढ़ता गया।मुझे मेरे दोनों बड़े भाइयों से सदैव बहुत प्यार और प्रोत्साहन मिलता रहा।
उम्र के ७०वें दशक मे मुझे कयी बीमारियों ने आ घेरा।दिल का दौरा भी पड़ा और उस कठिन समय मे मेरे भतीजे सन्दीप एवं पुत्र अक्षय ने तन-मन-धन से सहयोग कर लखनऊ जा कर मेरा इलाज कराया और मेरी धार्मिक भावनाओं से युक्त पत्नी की हृदय से निकली प्रार्थनाओं के कारण मैंने पुनः शक्ति प्राप्त की।
इस बीच मेरा लेखन कार्य जो मैं सन् २००८ से भजन, शेर- शायरी आदि लिखता था पूर्णतया अवरुद्ध था। कभी कभी मैं २,४ शेर लिख देता और जिन समूहों से मैं जुड़ा हुआ था उनमें पोस्ट कर देता था।
सन २०१९ मे मेरा सम्पर्क एक साहित्यिक समूह की सर्वे -सर्वा आदरणीया मीरा चौरसिया जी से हुआ। वे बहुत विदुषी, सम्भ्रांत एवं विनीत महिला हैं। हिन्दी एवं संसकृत से M A एवम् डौक्ट्रेट की डिग्री हासिल कर आप एक महाविद्यालय मे एसो.प्रोफ़सर हैं।
उनके द्वारा उत्साह वर्धन से और नये नये विषय पर कविताएं,गीत,छन्द,लघु कथा,पत्र लेखन आदि पर नित्य ही लिखते रहने से मेरा अभ्यास हो गया और अभी तक मेरी ४ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं मैं इसका सम्पूर्ण श्रेय आदरणीया मीरा जी को एवं आपकी विदुषी टीम सभी आदरणीया प्रिय छोटी बहिने अर्चना दीवान, चन्दा डांगी , पूनम शर्मा आदि को देता हूं।
ज़िन्दगी इस प्रकार उलझनो एवं आसानियों के बीच गुजरती जा रही थी कि जुलाई सन् २०२२ में अचानक मुझे ' हर्पीज ' नामक अजब नसों की बीमारी ने आ घेरा।
उस समय मेरे पुत्र अक्षय एवं पत्नी मंजु ने बहुत परिश्रम किया। सभी एलोपैथिक एवं होम्योपैथिक डाक्टर से वह सम्पर्क में रहा और दवा नियमित चलती रही। हर्पीज में सर आदि अंगों में बहुत दर्द होता है।कभी मैं ज़ीने की इच्छा ही खो देता था ।उस समय भी पत्नी मंजु और मीरा जी मुझे बहुत हौसला देती थीं।आज मैं बेटा अक्षय,मंजु एवं मीरा जी के निस्वार्थ प्रेम एवं परिश्रम के कारण ही दुबारा शक्ति संजो पाया। मंजु ने हृदय से भक्ति पूर्वक जो प्रार्थनाएं की वह सुफल देने वाली सिद्ध हुईं।
मैं परीवार के सभी सदस्यों से बहुत प्रसन्न हूं कि उन्होंने सत्य ही पारिवारिक भावना से न केवल कर्तव्य का निर्वहन किया बल्कि हृदय से ,अपने कार्यों से मेरा बहुत ख़्याल रखा।
मैं ईश्वर से सभी के सदा स्वस्थ और प्रसन्न रहने की कामना करता हूं।
............................. आनन्द
Gunjan Kamal
13-Feb-2023 11:25 AM
👌👌👌
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अदिति झा
07-Feb-2023 11:38 PM
Nice 👌
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